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भोपाल18 मिनट पहले

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रीवा की महिला के पेट के चार बड़े ऑपरेशन हो चुके थे। 5वां बच्चेदानी का होना था। बात जान पर बन आई थी। कई डॉक्टरों को दिखाया। उन्होंने ऑपरेशन से मना कर दिया। वजह थी- ऑपरेशन में रिस्क बहुत था। दरअसल, महिला के पेट में पहले ही चार चीरे लग चुके थे। पांचवां चीरा लगाकर ऑपरेशन करने का खतरा कोई मोल नहीं लेना चाहता था।

महिला ने भोपाल आकर सिद्धांता रेडक्रॉस हॉस्पिटल में दिखाया। डॉक्टर नीतिका वार्ष्णेय ने लेजर ऑपरेशन (लेप्रोस्कोपिक सर्जरी) कर उनकी तकलीफ दूर की। डॉक्टर के मुताबिक, यह एक क्रिटिकल ऑपरेशन था। ऑपरेशन करना भी बहुत जरूरी था। पेशेंट की हालत बिगड़ती जा रही थी। अब पेशेंट पूरी तरह ठीक हैं।

क्या चैलेंज था?

डॉ. नीतिका के अनुसार, ‘मरीज के पहले से चार बड़े ऑपरेशन (Total Proctocolectomy (for ulcerative colitis), Stoma closure, Hernioplasty, Cesarean Section) हो चुके थे। यानी चार बार बड़े चीरे लगाकर पेट खुला और टांके लगाकर बंद किया गया। 5वां ऑपरेशन भी बड़ा चीरा लगाकर करते, तो मरीज की जान को खतरा हो सकता था। ऐसे केसेस में मरीज के ज्यादा खून बहने की आशंका भी रहती है। इसी वजह से यह ऑपरेशन बहुत ज्यादा जटिल था।’

डॉ. नीतिका ने बताया, ‘इस कंडीशन में हमने पेशेंट की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी करने का फैसला लिया। मरीज का 10 दिन पहले ऑपरेशन किया। अब वे पूरी तरह ठीक हैं।’

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी साधारण सर्जरी से कितनी अलग?

  • साधारण सर्जरी: मरीज का ऑपरेशन एक बड़ा चीरा लगाकर किया जाता है। इसे करवाने में कई बार अधिक ब्लड लॉस होने के चांस रहते हैं। इस सर्जरी के बाद करीब 3 से 4 दिन तक एंटीबायोटिक्स भी लेनी होती हैं। मरीज को करीब 5 दिन तक भी एडमिट रहना पड़ता सकता है।
  • लेप्रोस्कोपिक सर्जरी: एक छोटा सा छेद कर दूरबीन से अंदर के बॉडी पार्ट्स को देखा जा सकता है। इसकी खास बात यह भी होती है पेट के अंदर के स्ट्रक्चर (एनाटॉमी) का पूरा व्यू देखने को मिलता है। इससे अंदर की पूरी कंडीशन स्पष्ट हो जाती है। करीब 24 घंटे में मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाता है।

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