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  • Met Mother In Indore After A Month And A Half, Started Crying On Seeing Her, Know What The Police Said…

इंदौर31 मिनट पहले

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मां को देख रो पड़ा आकाश। हालांकि वह देखभाल कर रहे पुलिसकर्मी और स्टाफ के पास से जाने को तैयार नहीं था।

डेढ़ माह पहले रतलाम के पास ट्रेन के कटने से जिस 6 साल के मासूम आकाश के हाथ-पैर कट गए थे, आखिरकार उसके परिजनों का पता चल गया। रविवार शाम उसकी मां, दादी व अन्य रिश्तेदार खरगोन से एमवाय अस्पताल पहुंचे। पुलिसकर्मी चेतन नरवले ने जैसे ही आकाश को उसकी मां को दिखाया तो दोनों एक-दूसरे को सिर्फ देखते रहे और फिर आकाश रोने लगा।

आकाश के पिता बीमार होने के कारण इंदौर नहीं आ सके। मां तो कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है कि आकाश किन परिस्थितियों में दुर्घटना का शिकार हुआ था जबकि रिश्तेदारों ने बताया कि वह गोद में से गिर गया था। इसके बाद दंपती मजदूरी करने गुजरात चले गए थे। मां भले मिल गई पर उन्होंने आकाश का पता क्यों नहीं लगाया, उसकी गुमशुदगी क्यों दर्ज नहीं कराई जैसे कई सवाल अभी अनसुलझे हैं। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुष्टि होने के बाद ही आकाश को उसकी मां रेशमा को सौंपा जा सकेगा। वरिष्ठ अधिकारी मामले की तहकीकात कर रहे हैं। अभी बच्चा सरकार के पास है। पूरी विधिवत कार्यवाही, पहचान के दस्तावेज, जांचें आदि कराने तथा पुष्टि होने के बाद उन्हें बच्चा मिल सकेगा।

मां और दादी के साथ आकाश।

मां और दादी के साथ आकाश।

डेढ़ माह पहले रतलाम रेलवे स्टेशन पर इस हालात में मिला था आकाश।

डेढ़ माह पहले रतलाम रेलवे स्टेशन पर इस हालात में मिला था आकाश।

‘दैनिक भास्कर’ ने इस मामले को सबसे पहले उठाया था। पुलिस की कई टीमें उसके माता-पिता का पता लगा रही थी। इधर, आकाश बार-बार अपनी मां को याद कर रहा था जबकि पुलिसकर्मी, मेडिकल स्टाफ अन्य मरीजों के परिजन भी उसकी सेवा कर रहे थे।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबरों-फोटो से रिश्तेदार ने पहचाना, उन्होंने मां-बाप को सूचना दी

दरअसल आकाश की मां रेशमा और पिता भीम खरगोन के सांगवी के रहने वाले हैं और मजदूरी करते हैं। उनका दूसरा बेटा राज एक साल का है। उनके इंदौर आए रिश्तेदार तैरसिंह व ग्रामीण कैलाश ने पुष्टि की कि आकाश भीम-रेशमा का बेटा है। तैरसिंह (सांगवी) ने बताया कि शनिवार को उसने सोशल मीडिया पर आकाश का वीडियो देखा तो उसे पहचान लिया। यह बात उसने आकाश के माता-पिता को बताई। इसके बाद रविवार को मां रेशमा, दादी व अन्य रिश्तेदार इंदौर पहुंचे। हालांकि आकाश मां रेशमा को देखते ही रोने लगा और उसकी देखभाल कर रहे चेतन नरवले से गले लगकर रोने लगा।

आकाश के इंदौर से जाने की बात सुनकर अस्पताल की महिला कर्मचारी और मासूम आकाश की आंखें भर पाई।

आकाश के इंदौर से जाने की बात सुनकर अस्पताल की महिला कर्मचारी और मासूम आकाश की आंखें भर पाई।

और रो पड़े नरवले, खुशी-खुशी टेबल-कुर्सी पर भोजन किया

पुलिसकर्मी चेतन नरवले ने आकाश की मां से कई सवाल किए। मां रेशमा ने कोई जवाब नहीं दिया तो चेतन रो पड़े और कहा यह मेरा बेटा है। डेढ़ माह से हरदम हमारे साथ है। वह हमसे घुल मिल गया है। वह मुझे ही अब पिता समझता है। उधर, स्टाफ व पुलिसकर्मी के लाड-प्यार से आकाश की सेहत में लगातार सुधार हो रहा है। उसे क्रिकेट का शौक तो है ही अब भोजन भी काफी चाव से करता है। पुलिसकर्मी चेतन ने उसे कई नई ड्रेसें दिलाई। रविवार को भी भी उसे नई ड्रेस पहनाई गई। शाम को चेतन भोजन करने नीचे जाने लगे तो उसने भी साथ में चलने की जिद की तो वे उसे साथ ले गए वहां उसने कुर्सी पर बैठकर अपने हाथ से भोजन किया तो वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आई।

डेढ़ माह में पिता-पुत्र जैसा रिश्ता... । पुलिसकर्मी चेतन नरवले के साथ भोजन करता आकाश।

डेढ़ माह में पिता-पुत्र जैसा रिश्ता… । पुलिसकर्मी चेतन नरवले के साथ भोजन करता आकाश।

आकाश के रतलाम से इंदौर आने की पूरी कहानी यहां पढ़ें

बिन मां-बाप के बच्चे के हाथ-पैर ट्रेन से कटे:6 साल का मासूम अस्पताल में कराहता है तो पूरा वार्ड रो पड़ता है

इंदौर के महाराजा यशवंत राव हॉस्पिटल की दूसरी मंजिल का एक वार्ड। यहां कई मरीज भर्ती हैं, लेकिन यहां 7 दिन से भर्ती 6 साल के बच्चे की हालत और कराह से हर कोई सहम उठता है। आंसू फूट पड़ते हैं। कुछ पल के लिए अपनी तकलीफ भूलकर प्रार्थना करने लगते हैं कि ‘हे भगवान! इस ‘बिन मां-बाप’ के मासूम का दर्द कब खत्म होगा?’

3 मार्च को रतलाम के पास यह बच्चा रेलवे ट्रैक पर खून में लथपथ मिला था। एक पैर और एक हाथ कट कर धड़ से अलग हो गए हैं। दूसरा हाथ और दूसरा पैर भी बुरी तरह कुचले हुए हैं। दो सर्जरी के बाद जान बच गई, लेकिन ये बच्चा आखिर कौन है? कहां से आया? 7 दिन बाद भी किसी को नहीं पता। उसकी टूटी-फूटी बातों से पता चला है कि वो आदिवासी वर्ग से है। अब अस्पताल स्टाफ, जीआरपी और भर्ती मरीजों के अटैंडर वार्ड में उसे पाल-संभाल रहे हैं। यही उसके तीमारदार हैं।

दैनिक भास्कर ने सर्जरी करने वाले डॉ. आकाश कौशल, डॉ. शिरीष जादौन (आर्थोपैडिक), बच्चे को रतलाम से इंदौर तक लाए जीआरपी कॉन्स्टेबल गुजरभोज और पीडियाट्रिक वार्ड के अटैंडर्स से बातचीत की… जानिए इस बच्चे की पूरी कहानी, इन्हीं की जुबानी…

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