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ग्वालियर7 मिनट पहले

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कई महीनों से राजनीतिक व प्रशासनिक दांवपेंच में फंसे ग्वालियर के मास्टर प्लान को राज्य शासन ने शुक्रवार को लागू कर दिया। - Dainik Bhaskar

कई महीनों से राजनीतिक व प्रशासनिक दांवपेंच में फंसे ग्वालियर के मास्टर प्लान को राज्य शासन ने शुक्रवार को लागू कर दिया।

कई महीनों से राजनीतिक व प्रशासनिक दांवपेंच में फंसे ग्वालियर के मास्टर प्लान को राज्य शासन ने शुक्रवार को लागू कर दिया। राज्यपाल के उपसचिव शुभाशीष बैनर्जी ने मास्टर प्लान लागू होने का गजट जारी किया। 2035 तक शहर के विकास की दशा व दिशा तय करने वाले इस मास्टर प्लान के लागू होने के बाद शहर में आवासीय एवं व्यावसायिक प्रोजेक्ट को बढ़ावा मिलेगा। शहर में अब तक 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर ही व्यावसायिक निर्माण की अनुमति मिलती थी। जो कि अब 18 मीटर चौड़ी सड़क पर ही मिल जाएगी। साथ ही 1500 वर्गफीट के प्लॉट पर 12.5 मीटर ऊंचे यानी कि 4 मंजिला भवन निर्माण को विभागों से स्वीकृति मिल सकेगी।

अब तक यह 4 से 4.5 मीटर तक ही था। टीएंडसीपी (नगर तथा ग्राम निवेश विभाग) द्वारा मास्टर प्लान का प्रारूप अक्टूबर में शासन के पास भेजा गया था। लेकिन शासन स्तर पर चल रहे दांवपेंच के कारण यह लागू नहीं हो पाया। तब इस मामले को लेकर लखन चौरसिया द्वारा मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में याचिका दायर की गई और 12 अप्रैल को हाईकोर्ट ने इस मामले में शासन से जवाब मांगते हुए कहा था कि अधिकारी शपथ पत्र पर बताएं कि कब तक मास्टर प्लान लागू हो सकेगा। इस आदेश के 10 वें दिन शासन द्वारा मास्टर प्लान लागू कर दिया गया।

मास्टर प्लान के बारे में

  • 23 – लाख आबादी के हिसाब से तैयार हुआ
  • 28.23 – लाख आबादी का अनुमान 2041 तक
  • 534 – वर्ग किलो निवेश क्षेत्र के लिए तैयार प्लान
  • 427 – वर्ग किलो निवेश क्षेत्र के लिए था पिछला प्लान

शहर के विकास में ऐसे आएंगे बदलाव

व्यावसायिक: मास्टर प्लान में हुए नए प्रावधान से शहर में व्यावसायिक क्षेत्र बढ़ेंगे। क्योंकि, अब 18 मीटर चौड़ी सड़क पर भी व्यावसायिक निर्माण की अनुमति मिलेगी। अब तक यह अनुमति 24 मीटर चौड़ी सड़क पर ही मिलती थी। इस बदलाव के बाद सिटी सेंटर में एसपी ऑफिस के पास से गोविंदपुरी रोड को जोड़ने वाली सड़क, स्टेट बैंक दफ्तर रोड, थाटीपुर, तानसेन नगर समेत लश्कर व मुरार के ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां पहले से व्यावसायिक गतिविधियां ज्यादा हैं। मगर निर्माण शर्तों का उल्लंघन है, अब वर्गफीट प्रावधान इन्हें राहत देगा।

एफएआर- पुराने मास्टर प्लान के अनुसार अब तक लोगों को 2.5 गुना एफएआर मिलता था। जो अब नए मास्टर प्लान के अनुसार सिर्फ 1.5 गुना ही मिलेगा। यानी कि 1 हजार वर्गफीट के प्लॉट पर अब 1500 वर्गफीट निर्माण किया जा सकेगा। जाे कि पहले 2500 वर्गफीट तक हो सकता था। यहां 1 गुना एफएआर कम कर दिया गया है। वहीं अतिरिक्त एफएआर की कैटेगरी में पुनर्निर्माण पर 0.25 गुना एफएआर मिलता था। जिसे अब शून्य कर दिया गया है।

बायपास- बायपास पर पहले 100 मीटर हरित क्षेत्र का प्रावधान था। नए मास्टर प्लान में इसे कम कर 35 मीटर कर दिया गया है। यानी कि बायपास सड़क से 35 मीटर तक निर्माण पर रोक रहेगी और उसके बाद जमीन का आवासीय एवं व्यावसायिक उपयोग किया जा सकेगा। 35 मीटर हरित क्षेत्र में भी सुविधाओं का निर्माण होगा।

हरित क्षेत्र- शहर में स्थित हरित क्षेत्र का विकास निवेश क्षेत्र में उपलब्ध लगभग 25 प्रतिशत वन भूमि के अंतर्गत पौधरोपण द्वारा किया जाएगा। इसके लिए शासकीय भूमि ही प्रस्तावित की गई है। क्योंकि निजी भूमि के अधिग्रहण द्वारा हरित क्षेत्र का विकास किया जाना शासन की विकास संस्थाओं के लिए संभव नहीं होगा। शेष | पेज 6 पर

यह भी प्रावधान

  • पार्किंग रहित भवनों की कंपाउंडिंग नगर निगम में पार्किंग शुल्क जमा कर संभव हो सकेगा
  • कृषि उपयोग में गैर प्रदूषणकारी उद्योग, रेस्टोरेन्ट, आईटी पार्क हॉस्पिटल, विद्यालय एवं लॉजिस्टिक पार्क की स्वीकृति मिलेगी।
  • आवासीय/वाणिज्यिक/सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक भूमि उपयोगों को मिश्रित उपयोग में मान्य किये जाने से इनमें से किसी भी एक उपयोग अथवा तीनों उपयोगों की स्वीकृति मिल सकेगी।

मंत्री की जिद में फंसा था पेंच
शहर का मास्टर प्लान-2035 दिसंबर में ही लागू हो जाना था। लेकिन प्रदेश सरकार के उद्यानिकी मंत्री भारत सिंह कुशवाह ने मुख्य सचिव तक नोटशीट चलाकर मास्टर प्लान में अधिकारियों की मनमानी की शिकायत की। साथ ही अपने विधानसभा क्षेत्र के पिपरौली, केदारपुर की जमीनों के सर्वे नंबरों को मास्टर प्लान में शामिल कराने की बात कही। जिसके बाद मास्टर प्लान का प्रकाशन रुक गया और उक्त जमीनों को मास्टर प्लान में शामिल किया गया है या नहीं? यह अब भी अधिकारी स्पष्ट नहीं कर पा रहे। अधिकारियों का कहना है कि जब फाइनल प्रारूप सामने आएगा, तब ही इस बारे में कुछ पता चलेगा।

लागू हो गया है मास्टर प्लान
“शासन द्वारा मास्टर प्लान लागू कर दिया गया है। अब 2035 तक शहर में विकास कार्य एवं प्रोजेक्ट इस मास्टर प्लान के प्रावधानों के अनुसार होंगे। प्लान की अंतिम स्वीकृत कॉपी अभी आई नहीं है। उसके आने के बाद सारी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।”
– वीके शर्मा, संयुक्त संचालक/ टीएंडसीपी

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